Tuesday, 7 March 2017

महिला दिवस पर विशेष (Happy Women Day)

नारी महज दो अक्षर नही है वो तो आत्मविश्वास से भरी एक प्रेरक मिसाल है। अपने हौसले के दम पर अनंतकाल से नित नये कीर्तिमान रच रही है। माँ, बेटी हर रूप में वो सृष्टी का आधार। आसमान सा है उसका विस्तार एवं धरती सा है धैर्य उसमें।  स्नेह का दरिया बन बहती है निर्झर अविरल। रिश्तों नातों से सजा गरिमामय श्रृंगार है उसका। ऐसी नारी को महज एक दिन  नही, ता उम्र मेरा सलाम है। 

मैं अनिता शर्मा आज के इस खास दिन अपनी उन बहनों से गुजारिश करती हुँ, जो घर परिवार का ध्यान रखते हुए अपनी  संतुष्टी के लिये समाज के ऐसे वर्ग का सहयोग करना चाहती हैं , जो शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं परन्तु दृष्टी दिव्यांगता के कारण पुस्तक पढने में अक्षम हैं। आत्मनिर्भरता का सपना सजोये ऐसे बहुत से विद्यार्थी हैं जो ध्वनांकित यानी Recorded पाठ्य सामग्री के अभाव में आगे बढने से वंचित रह जाते हैं। यदि इन बच्चों को आपका सहयोग मिल जाये तो ये बच्चे भी इतिहास रच सकते हैं। आप घर पर ही रहते हुए इनकी शिक्षा को सुगम बना सकती हैं। शिक्षा की इस मुहीम में सहयोग की इच्छा रखने वाली बहने, अधिक जानकारी के लिये मेल करें ...........
Mail ID-   voiceforblind@gmail.com 

सखियों, हम आपलोगों के साथ एहसास एकांकी का लिंक शेयर कर रहे हैं। इस नाटक के निर्देशन से लेकर अभिनय तक हमारी दृष्टीबाधित बेटियों ने खूबसूरती से निभाया है और समाज को संदेश दिया है कि, बेटी को यदि शिक्षित करोगे तो वो भी उत्कृष्ठ कार्य कर सकती है। 

एहसास












2 comments:

  1. इस अच्छे आलेख के लिए धन्यवाद अनीता जी.

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  2. Keep it up. Go ahead. Nice job
    Anita ji.

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